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    आखिर क्यों तेजी से घूमी धरती, जानिए क्या है पूरा माजरा

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    खुशी बाली, नई दिल्ली

    स्कूल में भूगोल विषय सभी ने पढ़ा होगा। बचपन से हमें यही बताया गया है कि पृथ्वी 24 घंटे में अपना एक चक्कर पूरा करती है। इसी वजह से 1 दिन में 24 घंटे होते हैं। परंतु इस बार कुछ नया सुनने को मिल रहा है। धरती अपने ऐक्सिस पर सामान्य से ज्यादा तेजी से घूम रही है। यह बहुत ही हैरान करने वाली बात है।

    वैज्ञानिकों का क्या कहना है?

    वैज्ञानिकों ने स्वयं खुलासा किया है कि पिछली आधी सदी की तुलना में अब समय तेजी से गुजर रहा है। डेली मेल के अनुसार साल 2020 से हर दिन 24 घंटे से कम समय ले रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि औसतन दिन 24 घंटे से लगभग 0.5 सेकंड कम होते हैं। इस घटना ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों को गहरी सोच में डाल दिया है। वह विचार कर रहे हैं कि समय से एक सेकंड को हटाना सही है या नहीं। यह बदलाव पृथ्वी के घूमने के साथ समय के पारित होने को बनाए रखने को किया जा सकता है। 2015 में एक पेपर ने प्रस्ताव दिया कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी के घूर्णन में परिवर्तन हो सकता है। ग्लेशियरों का पिघलना आंशिक रूप से ग्रह की धुरी पर तेजी से घूमने के लिए जिम्मेदार है।

    2020 से संबंध तथा ‘निगेटिव लीप सेकेंड’ का असर

    यह तो हम सभी को पता है कि बीते 50 सालो में धरती ने लगभग 86,400 सेकेंड का वक्त अपने ऐक्सिस पर घूमने में लगाया है। लेकिन बात करे 2020 की तो उस साल के बीच से यह चक्र डगमगा गया था यानि 2020 से एक दिन को पूरा होने में 86,400 सेकेंड से कम का वक्त लग रहा है। जुलाई 2020 में एक दिन 24 घंटे से 1.4602 छोटा था । यह अबतक का सबसे छोटा दिन माना गया है। देखा जाए तो अब हर दिन 0.5 सेकेंड पहले खत्म हो जाता है। सोचने वाली बात यह है कि क्या इस बदलाव का कोई असर हो सकता?सैटलाइट और संपर्क उपकरण सोलर टाइम के हिसाब से काम करते हैं जो तारों, चांद और सूरज की स्थिति पर निर्भर होता है। जिसको बरकरार रखने के लिए लीप सेकेंड जोड़ना पड़ता था इसलिए हो सकता है इस स्थिति के कई असर हों।

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