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    इस बार गणतंत्र दिवस परेड में बांग्लादेश के जवान भी करेंगे मार्चिंग

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    आशिषा सिंह राजपूत, नई दिल्ली

    नया साल अपने साथ नई उम्मीदों के साथ नए रिश्ते को पुनः स्थापित करना आरंभ कर दिया है। इस कड़ी की पहले शुरुआत नव वर्ष पर गणतंत्र दिवस परेड में बांग्लादेशी सैनिकों के शामिल होने से हुई है। समाचार एजेंसी एएनआइ की रिपोर्ट से यह बात सामने आई है। बांग्लादेश के जवान भारत के आमंत्रण पर गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने आए रहें हैं। बता दें कि इस खास गणतंत्र दिवस पर बांग्लादेश की स्वर्ण जयंती और 1971 में पाकिस्‍तान के साथ हुए युद्ध में भारतीय सेना की जीत के 50 साल पूरा होने के अवसर पर गणतंत्र दिवस की परेड में हिस्सा लेने के लिए बांग्लादेशी सैन्‍य दल को आमंत्रित किया गया था।

    खास होगा गणतंत्र दिवस

    कोरोना काल में भी गणतंत्र दिवस इस बार बेहद खास होगा। एएनआई रिपोर्ट के अनुसार रक्षा अधिकारियों ने कहा है कि 1971 की लड़ाई में पाकिस्तान पर भारतीय जीत के 50 वें वर्ष में , बांग्लादेश सेना का एक प्रतिनिधिमंडल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस की परेड में हिस्सा लेगा। स्वतंत्रता संग्राम के सभी सैन्य संघर्ष की बात की जाए तो 1971 में हुआ युद्ध सबसे बड़े प्रभावशाली और सबसे छोटे अभियानों में से एक है। 1971 के युद्ध में हार का सामना करने के बाद तेज अभियान के परिणामस्वरूप एक नए राष्ट्र का जन्म हुआ था। बात अगर इस वर्ष 2021 के गणतंत्र दिवस की जाए तो यह बेहद खास मौका होगा जब बांग्लादेशी सेनानी भारत के गणतंत्र दिवस में मार्चिंग करते नजर आएंगे।

    1971 भारत-पाक युद्ध

    वर्ष 1971 भारत और पाकिस्तान के युद्ध का दौर था। जिसमें दोनों देशों के सैन्य संघर्ष की दास्तां बनी। इस युद्ध की शुरुआत पाकिस्तान द्वारा भारतीय वायुसेना के 11 स्टेशनों पर रिक्तिपूर्व हवाई हमले से हुआ, इस हमले के पश्चात भारतीय सेना पूर्वी पाकिस्तान में बांग्लादेशी स्वतंत्रता संग्राम में बंगाली राष्ट्रवादी गुटों के समर्थन में खड़ी हो गई। 13 दिन तक चलने वाले इस स्वतंत्रता संग्राम 3 दिसंबर, 1971 से दिनांक 16 दिसम्बर, 1971 तक चला। इस युद्ध की समाप्ति ‘ढाका समर्पण’ पर हुई।

    युद्ध में भारतीय एवं पाकिस्तानी सेनाओं का एक ही साथ पूर्वी तथा पश्चिमी दोनों फ्रंट पर सामना हुआ और पाकिस्तानी पूर्वी कमान के समर्पण अभिलेख पर 16 दिसम्बर, 1971 में ढाका में हस्ताक्षर किए जाने के साथ ही पूर्वी पाकिस्तान को एक नया राष्ट्र बांग्लादेश घोषित किया गया। पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख आमिर अब्दुल्ला खान नियाज़ी ने अपने 93,000 सैनिकों के साथ, संबद्ध बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया, जिसमें भारतीय सेना के जवान भी शामिल थे।
    पूर्वी पाकिस्तान में स्थापित प्रभावशाली बंगाली लोगों एवं पाकिस्तान के चार प्रान्तों में बसे बहु-जाति पाकिस्तानी लोगों के बीच राज्य करने के अधिकार को लेकर चल रहे मुक्ति संघर्ष ने भारत-पाकिस्तान युद्ध में चिंगारी का काम किया।

    1971 बांग्लादेश के स्वतंत्रता संघर्ष में भारत की भूमिका

    पाकिस्तानी सेना व्यापक तौर पर बंगाली नागरिकों को मार रही थी, जिसमें विशेष तौर पर अल्पसंख्य्क हिन्दू समुदाय को बड़ा निशाना बनाया गया। इसके परिणामस्वरूप इस समुदाय को पड़ोसी देश पूर्वी भारत में शरण लेने हेतु भागना पड़ा। पलायन किए गए इन शरणार्थियों के लिये पूर्वी भारत की सीमाओं को भारत सरकार द्वारा खोल दिया गया। इन्हें शरण देने हेतु निकटवर्ती भारतीय राज्य सरकारों, जैसे पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, असम, मेघालय एवं त्रिपुरा सरकारों द्वारा बड़े स्तर पर सीमावर्त्ती क्षेत्रों में शरणार्थी कैम्प भी लगाये गए।

    लेकिन यह सब करने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ा इसे देखते हुए तत्कालीन भारतीय प्रधान मंत्री इन्दिरा गाँधी ने 27 मार्च 1971 को पूर्वी पाकिस्तान के मुक्ति संघर्ष के लिये अपनी तत्कालीन सरकार के पूर्ण समर्थन देते हुए कहा कि लाखों शरणार्थियों को भारत में शरण देने से कहीं बेहतर है कि पाकिस्तान के विरुद्ध युद्ध कर इस संघर्ष को विराम दिया जाए। इंदिरा गांधी के दिए गए इस आदेश के बाद पूर्व में भारत समर्थित बांग्लादेशी राष्ट्रवाद की सशक्त लहर फैल गयी थी। वहीं बहु-जातीय पाकिस्तानियों की लक्ष्य बना युद्ध और घमासान होता गया बहुत सी हत्याएं और भारी नुकसान हुए।

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