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    ममता बनर्जी के राजनीतिक सफर और जीवन पर एक नजर

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    आशिषा सिंह राजपूत, नई दिल्ली

    भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल की वर्तमान मुख्यमंत्री एवं राजनैतिक दल तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी का आज (मंगलवार) जनवरी 5, जन्मदिन है। उनका जन्म कोलकाता में एक निम्न वर्गीय परिवार में गायत्री एवं प्रोमलेश्वर के यहां 1955 में हुआ। उनके पिता एक स्वतंत्रता सेनानी थे। महज 17 साल की उम्र में ममता बनर्जी ने अपने पिता को दवाई ना मिलने के कारण से हुई आकस्मिक मौत से खो दिया था। पिता का यू बीच मझधार में साथ छोड़ देने के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन्होंने दूध बेचकर संभाली।

    उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी से लॉ में स्नातक और आर्ट्स में मास्टर ली है। लोगों में उनकी छवि ‘दीदी’ के नाम से है। संगी नेता, विरोधी व जनता भी उन्हें दीदी कह कर संबोधित करती है। एक गरीब परिवार मे रह कर मूल जरूरतों को मुश्किलों से पूरा करते हुए बंगाल की सत्ता पर राज करने वाली ममता बनर्जी के जन्मदिन पर विशेष।

    ममता बनर्जी का राजनीतिक सफर

    70 के दशक में उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई के दौरान कांग्रेस पार्टी के जरिए राजनीति में कदम रखा। उन्होंने पूर्ण सक्रियता से पार्टी का कार्य किया। पार्टी ने उनकी मेहनत और लगन देखकर उन्हें महिला कांग्रेस का महासचिव बना दिया। ममता बनर्जी ने 1984 के आम चुनाव में जादवपुर सीट से सोमनाथ चटर्जी को हरा कर भारत की सबसे कम उम्र की सांसद बनी। उन्होंने लगातार 1996, 1999, 2004 और 2009 में कोलकाता सीट से लोकसभा चुनाव जीतकर एक नया कीर्तिमान रचा।

    1991 ममता बनर्जी का राज्य मंत्री पद का आरंभ हुआ राव सरकार में बनर्जी मानव संसाधन विकास, युवा मामले, खेल व महिला और बाल विकास राज्यमंत्री पद पर रही। लेकिन ममता बनर्जी एक सुनहरे भविष्य की तरफ बढ़ते हुए साल 1993 में ममता बनर्जी ने खेल मंत्रालय से इस्तीफा देकर 1997 में उन्होंने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस पार्टी बना ली। इस बीच ममता बनर्जी ने 1996 में कांग्रेस पर पश्चिम बंगाल में माकपा की कठपुतली होने का गंभीर आरोप लगाया। वर्ष 1999 में दीदी एनडीए का हिस्सा बनीं और इस कार्यकाल में वह रेलमंत्री बनी। लेकिन 2011 में उन्होंने खुद को एनडीए से अलग कर लिया।

    साधारण एवं सरल है ममता बनर्जी का जीवन

    बंगाल की सत्ता पर राज करने वाली ममता बनर्जी का वास्तविक जीवन बेहद सरल व साधारण है। अपने जीवन में संघर्षों की सीढ़ियों पर चढ़कर ममता बनर्जी ने सत्ता शासन की ऊंचाइयों अर्जित की हैं। इसलिए आज भी ममता बनर्जी कोलकाता में अपने पुश्तैनी निवास में रहती हैं। उनके सरलता का प्रमाण उनका सादगी भरा जीवन देता है। मुख्यमंत्री पद पर हो कर भी वह साधारण चप्पल एवं सफेद साड़ी धारण करती हैं।

    बंगाल 2021 चुनाव में दीदी की राजनीति

    यूं तो ममता बनर्जी बंगाल की राजनीति में पूरे मन से सक्रिय रहती हैं। जो उनके राजनीतिक सफर में साफ देखा जा सकता है, कि वो बंगाल की सत्ता को लेकर कितनी अडिग और अटल है। 2021 के विधानसभा चुनाव धीरे-धीरे नजदीक आ रहे हैं जस-तस विरोधी पार्टियां दीदी को पछाड़ने में लगी है, वहीं ममता बनर्जी अपनी पार्टी को जीत दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। भाजपा पूरी जी जान लगाकर आए दिन दीदी पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रही है। वही ममता बनर्जी भी भाजपा व अन्य विरोधी राजनीतिक पार्टियों का खूलकर का करारा जवाब दे रही है।

    साथ ही साथ ही भाजपा को ‘बाहरी लोगों की पार्टी’ बताते हुए कहती है कि वो नफरत की राजनीति को कभी भी बंगाल पर हावी नहीं होने देंगी। भाजपा किसी भी रुप से ममता बनर्जी की सरकार को आगामी चुनाव में पीछे कर सत्ता पाना चाहती है वहीं ममता बनर्जी आए दिन रोड शो करके लोगों को बंगाल की संस्कृति और सभ्यता का हवाला देते हुए कहती हैं कि बंगाल को भाजपा के सांप्रदायिक हमलों से बचाने की जरूरत है।

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