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    ‘आत्मसंयम दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा मायावती का जन्मदिन

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    आशिषा सिंह राजपूत, नई दिल्ली

    बहुजन समाज पार्टी बीएसपी सुप्रीमो मायावती का 65 वां जन्मदिन भव्य केक और पार्टी में नहीं बल्कि बेहद सादगी से मनाया जाएगा। पार्टी सूत्रों की माने तो मायावती इस वर्ष अपने जन्मदिन पर कोई भी भव्य पार्टी,‌ केक कटिंग, और भोजन का आयोजन नहीं करने वाली हैं। बीते वर्ष कोरोना महामारी, नवंबर में पिता के निधन , और देश में चल रहे किसान आंदोलन को देखते हुए मायावती ने इस वर्ष अपना जन्मदिन सादगी से मनाने का फैसला किया है।

    जन्मदिन की तैयारी

    मायावती ने भले ही अपना जन्मदिन पार्टी करके नहीं मना रही हो। लेकिन उन्होंने अपने जन्मदिन को खास बनाते हुए आत्मसंयम के दिन के रूप में मनाएंगी। गरीबों और श्रमिकों के बीच कपड़े और कंबल बांटकर, जरूरतमंद लोगों को वित्तीय सहायता करके आत्मसंयम दिवस मनाया जाएगा। बता दें कि इस वर्ष अपना जन्मदिन मनाने के लिए मायावती लखनऊ में नहीं बल्कि दिल्ली में रहेंगी। वही आत्मसंयम दिवस मनाने की पूरी जिम्मेदारी पार्टी के वरिष्ठ सदस्य द्वारा विभिन्न जिलों में कार्यों की देखरेख कर के पूरी की जाएगी।

    बहन जी के जीवन से जुड़ी दिलचस्प बातें

    1:- मायावती का पूरा नाम ‘मायावती नैना कुमारी’ है। लेकिन ज्यादातर लोग और मायावती के समर्थक उन्हें बहन जी कह कर संबोधित करते हैं
    2:- मायावती चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। बीएसपी सुप्रीमो मायावती के पास दिल्ली और लखनऊ दोनों जगह उनके खुद के बंगले हैं। लेकिन वह अपने परिवार से दूर रहती हैं।
    3- मायावती के पिता जी दिल्ली में दूरसंचार विभाग में क्लर्क के पद पर सरकारी कर्मचारी रहे हैं। वहीं उनकी माताजी एक सशक्त महिला रही हैं, जिन्होंने दिल्ली जैसे बड़े शहर में भैंसों को रखकर एक दूध की डेयरी चलाती थी। जिससे शुरुआती दिनों में उनके परिवार को आर्थिक मदद मिलती थी।
    4:- मायावती जब पहली बार उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री बनी थी। तब दलित उन्हें अपना मसीहा मानते थे। बता दें कि मायावती की दलित आंदोलन पर सोच और समझ की पकड़
    बाबा साहब अंबेडकर की जीवनी और उनकी किताबें पढ़कर आई थी। इस बात का जिक्र मायावती ने खुद अपनी आत्मकथा में किया है।

    मायावती का राजनीतिक जीवन

    उनके राजनीतिक जीवन की सर्वप्रथम शुरुआत 1977 में हुई थी। जब मायावती कांशीराम के सम्पर्क में आयीं। कांशीराम के संरक्षण में 1984 में बसपा की स्थापना हुई और उसी दौरान वह काशीराम की कोर टीम का हिस्सा रहीं। मायावती ने अपना पहला चुनाव उत्तर प्रदेश में मुज़फ्फरनगर के कैराना लोकसभा सीट से लड़ा था। 3 जून 1995 को वह पहली बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। इसके बाद मानो मायावती के राजनीतिक जीवन का एक सुनहरा काल शुरू हो गया। बात 2014 की लोकसभा चुनाव की जाए तो उनका बतौर मुख्यमंत्री दूसरा कार्यकाल 21 मार्च 1997 से 21 सितंबर 1997 तक, तीसरा कार्यकाल 3 मई 2002 से 29 अगस्त 2003 तक और चौथी बार 13 मई 2007 तक जारी रहा। राजनीतिक कार्यकाल में यह किसी कीर्तिमान से कम नहीं है।

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