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    क्या ये सरकार और किसानों के दिल मिलने की शुरुआत है?

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    आशिषा सिंह राजपूत, नई दिल्ली

    किसान और नेताओं के बीच कृषि कानून को लेकर मतभेद जारी है। लगातार 35 दिन से किसान कृषि कानून के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार और नेताओं द्वारा तरह-तरह के बयान हर रोज सामने आ रहे हैं। सरकार और किसान की कृषि कानून को लेकर 6 बार बैठक हो चुकी है, लेकिन निष्कर्ष तो दूर किसी एक बात पर सहमति भी अभी तक नहीं बनी।

    लेकिन आज सरकार के साथ सातवें दौर की बैठक में किसानों का प्रतिनिधि मंडल विज्ञान भवन में हुए ब्रेक के दौरान नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल के साथ खाना खाते और सेल्फी लेते हुए नजर आया। यह सब देख कर कयास लगाए जाने लग गए कि क्या सरकार और किसान के दिल मिलने की शुरुआत हो गई है?

    सरकार और किसान नेताओं की बैठक में चर्चा

    किसान और सरकार के बीच में कृषि कानून को लेकर जंग जारी है। किसानों और सरकार की इस मतभेद पर विराम लगाने के लिए लगातार बैठक बुलाई जा रही है। सूत्रों की माने तो बैठक की श्रंखला में मंगलवार को हुई सरकार और किसानों के बीच की सातवीं बैठक में लंच ब्रेक तक किसान और सरकार के बीच दो बिंदुओं कानून रद्द करने और एमएसपी पर कानून बनाने की बात होती रही। वहीं किसान नेताओं का यह कहना है कि सरकार अभी भी कृषि कानून वापस ना लेने पर अडिग है। और सरकार आगे नहीं बढ़ रही है।

    आज की बैठक में किसान नेताओं ने आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग की है। सरकार ने साथ ही बैठक में भी यह साफ कर दिया है कि तीनों कृषि कानूनों को सरकार वापस नहीं लेगी। लेकिन कृषि कानूनों से जुड़ी मांगों और मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक समिति बनाई जा सकती है।

    किसान नेता क्या बोले?

    किसान नेता सरकार की ज़िद के आगे झुकना नहीं चाहते हैं। वहीं किसान नेताओं ने यह बात साफ कर दी है कि वह संशोधन को लेकर कोई भी बात नहीं करेंगे और कानून को रद्द करवा कर ही वापस जाएंगे। वहीं अंततः सातवें दौर की बैठक में भी सरकार और किसानों पर असहमति का ग्रहण छाया हुआ है। और एक बार फिर आठवें चरण की बैठक के लिए 4 जनवरी की तारीख दी गई है।

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