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    बोरिस जॉनसन के भारत आने के क्या हैं राजनीतिक मायने

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    खुशी बाली, नई दिल्ली

    नया साल शुरू होने वाला है और इसके साथ ही गणतंत्र दिवस का जश्न शुरु होगा। बोरिस जॉनसन यूके के प्रधानमंत्री इस वर्ष अतिथि हैं। उन्होंने भारत के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है और 26 जनवरी, 2021 को मुख्य अतिथि के रूप में आएंगे। यहां याद दिला दें कि बोरिस जॉनसन से पहले 1993 में यूके के पूर्व प्रधानमंत्री जॉन मेजर गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत आ चुके हैं।

    G-7 पर असर

    ब्रिटेन ने भारत को G-7 समूह समारोह में शामिल होने का अवसर प्रदान किया है। कुछ लोगों का तो यह भी मानना है कि G-7 के सदस्य देशों ने भारत, ऑस्ट्रेलिया तथा दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर चीन के सामने चुनौती देने का सोचा है।
    हालांकि इस समय कोई तय स्थान या तारीख सामने नहीं आई है।

    बोरिस जाॅन्सन ही क्यों?

    माना जा रहा है कि दोनों देशों के संबंध मजबूत बनाने के लिए यह सब किया जा रहा है। यूके के विदेश मंत्री, डोमिनिक राब, 14-17 दिसंबर तक के लिए भारत आए हुए हैं। उन्होंने हमारे विदेश मंत्री से बात-चीत की तथा यह बात सामने आई है कि दोनों देशों के आर्थिक सुधार की गति तेज करने के लिए भारत-ब्रिटेन के बीच गठजोड़ महत्वपूर्ण है। पिछले 27 वर्षों में बोरिस जॉनसन इकलौते ब्रिटिश प्रधानमंत्री हैं, जो गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनकर आ रहे हैं। इसके पहले जॉन मेजर 26 जनवरी 1993 को मुख्य अतिथि बनकर भारत आए थे। वहीं 2020 में ब्राजील के राष्ट्रपति Jair Bolsonaro का इस अवसर पर आगमन हुआ था।

    यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोनों देश एक जुट होकर समस्याओं का समाधान निकाल पाएगें या नहीं।

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