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    विश्व के सबसे पुराने लोकतंत्र का भयावह दृश्य

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    आशिषा सिंह राजपूत, नई दिल्ली

    अमेरिका में हुए राष्ट्रपति चुनाव परिणाम के बाद से ही अमेरिका में तनातनी का माहौल बना हुआ है। बता दें कि नवंबर में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडन को 306 और रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप को 232 इलेक्टोरल कॉलेज वोट मिले थे। जीत की घोषणा के बाद से ही ट्रंप समर्थकों को यह बात हजम नहीं हो पाई है। कभी मतदान में कथित गड़बड़ी की बात सामने आती है तो कभी राजनीतिक आरोपों की बौछार होती है। राष्ट्रपति ट्रंप चुनाव परिणाम आने के बाद से ही लगातार जो बाइडन की जीत को पर शक करते आए हैं। वहीं अमेरिकी कांग्रेस में जो बाइडन को 2020 तीन नवंबर को हुए चुनाव में मिली जीत की पुष्टि के लिए चल रहे सत्र के दौरान ट्रंप समर्थकों की हिंसक भीड़ बैरिकेड तोड़ते हुए अंदर घुस गई। ट्रंप समर्थक हथियारों के साथ थे और सुरक्षा बल से भिड़ंत करते हुए सत्र की खिड़कियां तक तोड़ दी। इस विरोध प्रदर्शन में एक महिला को गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई।

    जो बाइडन का फूटा ग़ुस्सा

    इस पूरे मामले को देखकर जो बाइडन का गुस्सा फूटा विलमिन्गटन से बोलते हुए बाइडन ने कहा, ”लोकतंत्र अप्रत्याशित रूप से ख़तरे में है. मैं राष्ट्रपति ट्रंप से अपील कर रहा हूं कि वो नेशनल टीवी पर जाएं और अपनी शपथ का पालन करते हुए संविधान की रक्षा करें और कैपिटल को कब्जे से मुक्त कराएं. कैपिटल में घुसकर खिड़कियाँ तोड़ना, फ्लोर पर कब्जा कर लेना और उथल-पुथल मचाना विरोध नहीं फसाद है।”

    ट्रंप ने ट्वीट कर प्रदर्शनकारियों को वापस लौटने की की अपील

    मामले को इस स्तर पर बढ़ता देख राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्विटर पर एक वीडियो जारी करके प्रदर्शनकारियों से घर लौटने की अपील करते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखने को कहा। साथ ही साथ ट्रप ने अपनी बातों पर अडिग रहते हुए कहा कि “एक चुनाव हुआ, जिसे हमसे चुरा लिया गया।” वहीं मामले का तूल पकड़ा देख ट्विटर ने डोनाल्ड ट्रंप के अकाउंट को 12 घंटे के लिए रोक लगा दी है। और इस वीडियो संदेश पर लाइक, शेयर और जवाब देने के विकल्प बंद कर दिया।

    वॉशिंगटन डीसी में लगा कर्फ्यू

    ट्रंप समर्थकों द्वारा विरोध प्रदर्शन को बढ़ता देख और अमेरिकी कैपिटल बिल्डिंग पर हुए हमले के बाद वॉशिंगटन डीसी में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। कर्फ्यू बुधवार शाम छह बजे से गुरुवार सुबह तक के लिए लगाया गया है। इस हिंसक विरोध प्रदर्शन को शांत और काबू में करने के लिए सुरक्षा प्रमुख द्वारा कर्फ्यू की जानकारी देते ही सांसदों ने तालियां बजाईं।

    उपराष्ट्रपति पेंस हुए ट्रंप के ख़िलाफ़

    डोनाल्ड ट्रंप का जनता के दबाव को जारी रखते हुए, वाशिंगटन डीसी में अपनी रैली में समर्थकों से कहा कि “अगर पेंस चुनाव परिणामों को अस्वीकार नहीं करते तो उन्हें बहुत निराशा होगी।” यह बात सुनते ही उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने एक लिखित बयान जारी करते हुए कहा कि ”मैं न तो चुनाव परिमाण उलट सकता और ना जो बाइडन की जीत को खारिज कर सकता. जबकि डोनाल्ड ट्रंप का काफ़ी दबाव है मुझ पर।” यह बयान देते हि पेंस ट्रंप के ख़िलाफ़ हो गए हैं।

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