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    अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ रहा किसान आंदोलन

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    स्पर्श, नई दिल्ली

    कोरोना के प्रभाव को झेल रही भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने किसान आंदोलन एक नई चुनौती लेकर आया है. पिछले दो हफ्तों से अधिक का वक्त गुजर गया है और दिल्ली में किसान लगातार जमे हुए हैं. इस आंदोलन का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है. उद्योग जगत के लोगों का कहना है कि किसान आंदोलन में रास्ते बंद होने की वजह से माल ढुलाई में परेशानी आने लगी है और ढुलाई की लागत 10 प्रतिशत तक तथा समय 50 प्रतिशत तक बढ़ गया है. आंदोलन के बढ़ते समय के साथ ही अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव भी बढ़ना तय है।

    उद्योग जगत की अपील- हल निकाले सरकार

    उद्योग संगठन एसोचैम ने भी कहा है कि सिर्फ पंजाब, हरियाणा व हिमाचल प्रदेश के क्षेत्र में ही अर्थव्यवस्था को रोजाना 3000 से 3500 करोड़ तक का नुकसान हो रहा है. उद्योग जगत ने सरकार व किसान दोनों से जल्दी ही कोई हल निकालने की अपील की है. आंदोलन का सबसे ज्यादा असर पहाड़ी क्षेत्र जैसे जम्मू कश्मीर व हिमाचल प्रदेश के बाजारों पर हो रहा है, जो पूरी तरह मैदानी क्षेत्रों से आने वाले माल पर निर्भर रहते हैं. दिल्ली के बाज़ारों में कृषि उत्पादों की उपलब्धता को लेकर भी संशय बना हुआ है, जो कृषि क्षेत्र को बहुत नुकसान पहुंचा सकता है.

    दरअसल दिल्ली के बाजारों में कृषि उत्पाद हरियाणा, राजस्थान, उत्तरप्रदेश व पंजाब से ही आते हैं. अब जब इन्हीं प्रदेशों के ज्यादातर किसान सड़क पर बैठे हैं, तो माल की आपूर्ति को लेकर संशय होना लाजिमी है. इससे किसान व बाज़ार दोनों को नुकसान होना तय है. आंदोलन से राजधानी में आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी गिरावट आई है. पर्यटन उद्योग, जो राजधानी में बहुत लोगों की आजीविका का साधन है, कोरोना के कारण पहले ही पूरी तरह ध्वस्त था. अब जब यह फिर से पटरी पर लौट रहा था, आंदोलन के कारण फिर से प्रभावित होने लगा है. दिल्ली के आसपास के इलाके में बसी कम्पनियों के कर्मचारियों को काम पर आने जाने में परेशानी आ रही हैं, जिससे उत्पादकता प्रभावित हो रही है.

    वार्ता से नहीं निकल रहा है हल

    इस सबके बीच सरकार का कहना है कि आंदोलन से अर्थव्यवस्था पर न्यूनतम असर पड़ रहा है. गौरतलब है कि पिछले 20 दिन से विभिन्न राज्यों के किसान दिल्ली में नए कृषि कानूनों के खिलाफ़ आंदोलन कर रहे हैं. किसानों की मांग है कि सरकार ये तीनों कानून वापस ले परन्तु सरकार इस मांग को मानती नजर नहीं आ रही. किसान व सरकार के बीच इसे लेकर पहले ही पांच बार बातचीत हो चुकी है, परन्तु कोई हल नहीं निकल सका है. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि सरकार किसान नेताओं से संपर्क बनाए हुए है व आगे की मुलाकात जल्दी ही होगी.

    वहीं वकालत के एक छात्र की पिटीशन पर सुप्रीम कोर्ट ने आज सरकार को आदेश दिया है कि वो समाधान के लिए किसानों के साथ एक कमेटी बनाए, ताकि इस मसले का हल निकाला जा सके। इस मामले से जुड़े मुकदमे की सुनवाई कल फिर से होगी।

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