भारत की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा हमेशा से सुर्खियों में रहा है, हिंदुस्तान में ज्यादातर आंदोलन आरक्षण को लेकर ही होते रहते हैं। इस आरक्षण के खेल में अब एक नया खिलाड़ी और आ गया है। मुस्लिमों के नेता ओवैसी ने दलितों के कोटे में से मुस्लिमों के लिए आरक्षण की मांग की है।

गौरतलब है कि ओवैसी पर लगातार भड़काऊ और देश विरोधी भाषण देने का आरोप लगता रहता हैं, और इसलिए आए दिन वो सुर्खियों में बने रहते हैं। इस बीच ओवैसी का इस तरीके का बयान देना राजनैतिक जानकारों के मुताबिक बड़ी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। बहरहाल असदुद्दीन ओवैसी पर गाहे- बगाहे पीछे के रास्ते से कांग्रेस का लगातार समर्थन करते रहने का भी आरोप लगता आया है। कई लोगों का मानना है कि कांग्रेस को पीछे के रास्ते समर्थन के बदले वो दलित कोटे से मुस्लिमों के लिए आरक्षण चाहते है।

लिहाजा हाल ही में तेलंगाना और कर्नाटक के चुनाव में कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में मुस्लिमों के लिए आरक्षण से लेकर कई घोषणा करते हुए हिंदुओं को किनारे करने का काम किया है। सियासी जानकारों का कहना है कांग्रेस मुस्लिम वोटरों को साधने के लिए अब अपने “प्लान बी” पर काम कर रही हैं। जिसके तहत धीरे धीरे देश के तमाम राज्यों में दलितों के आरक्षण में से बड़ा हिस्सा मुसलमानों को देनें की योजना बन रही है।

कांग्रेस की इस मुस्लिम परस्त सोच और योजना के चलते दलित और ज्यादा पिछड़ सकते हैं। वहीं सूत्रों की मानें तो कांग्रेस इस एजेंडे पर ओवैसी से लगातार गुप्त मंत्रणा करते हुए, दलित आरक्षण से मुस्लिमों को आरक्षण देने वाली योजना पर काम कर रही है। खैर, कांग्रेस की मुस्लिमों को तहरीर देने वाली इस रणनीति के चलते उसके हाथ से बड़ा दलित वोट बैंक निकल सकता है।

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