किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के जागरूक नागरिकों को चाहिए कि वह चुनावों से पहले भावनात्मक नारों में न बह कर, हर प्रत्याशी को अच्छे से जांच परख ले और उसके बाद ही अपना मतदान करे। देश की जनता का यह आशा हर चुनावों में होता है कि उनके सासंद या विधायक, अपने अपने क्षेत्र में कानून का राज स्थापित करेगें तथा शांति और सद्भावना का माहौल बनाए रखेंगे।

ऐसे में राजनैतिक दलों का भी दायित्व बनता है कि वह अपना प्रत्याशी केवल ऐसे ही व्यक्तियों को बनाए जो स्वयं जिम्मेदार और कानून का पालन करने वाले नागरिक रह चुके हो। एक स्वस्थ लोकतंत्र में यह आती आवश्यक हो जाता है कि जन प्रत्याशी बिल्कुल साफ सुथरे पृष्ठभूमि से हो तथा उन पर कोई आपराधिक आरोप न हो। परंतु हमारे देश में राजनैतिक पार्टियां अक्सर ऐसा सुनिश्चित करने मे असफल रहती है।

राजस्थान के सांगानेर से कांग्रेस पार्टी ने पुष्पेन्द्र भारद्वाज को टिकट दिया है। लेकिन आप सब शायद जान कर हैरान रह जायेंगे कि इन पर एक महिला से बलात्कार करने का संगीन आरोप लगा था।

दरअसल, २०११ मे एक महिला ने आरोप लगाया था कि उसके पती ने अपने राजनैतिक सपनो को पूरा करने के लिए उसका बलात्कार करवाया था कई नेताओं से। उस महिला के मुताबिक, उन नेताओं मे पुष्पेन्द्र भारद्वाज भी शामिल थे। यह केस कई सालों तक चला और किसी को खास सजा नहीं हो पाई। पर ऐसे एक जुर्म में नाम आना ही अपने आप में एक बड़ा गम्भीर सवालिया निशान लगा देता है किसी व्यक्ति के पर।

सवाल है कि क्या कोई ऎसा व्यक्ति जिनका स्वंय का नाम बलात्कार के मामले में उछाला गया हो, वह सांगानेर की मा बहनों को सुरक्षा प्रदान कर पाएंगे?

ऐसे में सवाल कांग्रेस पार्टी की मंशा पर भी उठना लाजिमी है। सभी जानते हैं कि देश में नारी सुरक्षा आज एक ज्वलंत मुद्दा है। क्या कांग्रेस को ऐसे किसी व्यक्ति को टिकट देना चाहिए था जिनका नाम ऐसे अपराध के मामले में उछला हो?

खैर, लोकतंत्र का मजाक बनाते हुए परिवारवाद और अपराधवाद को बढ़ावा देना भारत के राजनैतिक दलों की आदत सी बन गई है और ऐसे में जनता को अधिक सचेत रहने की आवश्यकता है।

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