जी न्यूज और सुधीर चौधरी का रियलिटी चैक

विरोध और प्रश्नहीन समाज मे चौतरफा राज करना हर तानाशाह की हसरत रही है।

आज के युग मे टेलीविजन मीडिया एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट की तरह उभर आया है। असली कोर्ट मे सुनवाई हो या ना हो पर टेलिविजन मीडिया में उससे पहले ही निर्णय घोषित कर दिया जाता है, जहां पर कम ही ध्यान दिया जाता है कि वास्तविकता में कौन सही है और कौन गलत, मुख्यता TRP होती है। टेलीविजन मीडिया के बेताज बादशाहों में से एक जी-न्यूज के मुख्यसंपादक सुधीर चौधरी हमेशा से चर्चा का विषय रहे हैं, सुधीर चौधरी अपने शो DNA के लिए बहुत  जाने जाते हैं, DNA देश का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला प्राइम टाइम शो रहा है, इसीलिए उनका निष्पक्षता की कसौटी पर खरा उतरना अति आवश्यक है! लेकिन थोड़ी सी ही खोजबीन के बाद ज़ी-न्यूज & कंपनी के सारे भेद खुलने लगते हैं

मार्च 2007 में सुधीर चौधरी जी “जनमत न्यूज चैनल”(लाइव इंडिया) के CEO बनते हैं और कुछ ही महीने के भीतर उनका चैनल दिल्ली की एक स्कूल टीचर “उमा खुराना” पर छात्राओं को सेक्स रैकेट में लिप्त करने के अरोप में उनका स्टिंग ऑपरेशन करता है और उस स्टिंग ऑपरेशन को अपने चैनल पर खूब प्रसारित करता  है, जिससे अक्रोश में आकर कुछ लोग कैमरा के सामने ही उमा जी पर हमला कर देते हैं। कुछ ही महीनो के भीतर कोर्ट मे यह स्टिंग ऑपरेशन फर्जी पाया जाता है और सुधीर जी के चैनल को 20 सितंबर 2007 को एक महीने के लिए बंद कर दिया जाता है।


2012 में ज़ी-न्यूज मे कार्यरत रहते हुए सुधीर जी, कांग्रेस के सांसद नवीन जिंदल से 100 करोड़ रुपये की ब्लैकमेलिंग करते हुए पकड़े जाते हैं, जिसकी वजह से उन्हे और उनके साथी समीर अहलूवालिया को हिरासत में लिया जाता है और तिहाड़ जेल मे भेजा जाता है। बाद मे सुधीर जी को अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाता है।

जुलाई 2,2016 को सुप्रीम कोर्ट में, मुख्य-न्यायाधीश T. S. ठाकुर इसी प्रकरण में फिर से उन्हे  फटकारते हुए कहते हैं कि सुधीर चौधरी नियमों का पालन करे वरना फिर तिहाड़ भेज दिए जाएंगे।

21 फरवरी 2016 को ज़ी-न्यूज के प्रोड्यूसर विश्वदीपक ने चैनल पर गंभीर अरोप लगाते हुए ज़ी-न्यूज छोड़ दिया, उन्होने कहा कि ज़ी-न्यूज बहुत पक्षपाती तरीके से JNU मुद्दे को देश के सामने प्रस्तुत कर रहा था और इस तरह की चाटुकारिता उन्हे ना – गवार थी।
कई बार सुधीर जी की रिपोर्टिंग बहुत ही हास्यास्पद रह चुकी है, हद तो तब होगी जब विमूदृकरण के बाद मोदी सरकार की तारीफ करते करते इतना आगे बढ़ गए कि वह नए छपे नोट में GPS लगे होने की जानकारी देने लगे, सुधीर जी बड़े विस्तृत तरीके से यह बता रहे थे कि कैसे नोट मानव निर्मित उपग्रहों को सिग्नल भेजेंगे। सिग्नल ना सही पर नोट रंग ज़रुर छोड़ रहे थे जिसकी जानकारी सुधीर जी ने जनता को कभी नहीं दी।

गौर-तलब है कि पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी ज़ी-न्यूज पर 100 करोड़ का मानहानि का मुकदमा दर्ज कर चुके हैं, जब ज़ीन्यूज ने 2012 में बिना किसी तथ्यों के धोनी पर मैच फ़िक्सिंग का अरोप लगाया था।

ऐसा बिल्कुल नहीं है कि सिर्फ ज़ी-न्यूज और सुधीर चौधरी सवालों के कटघरे मे हैं , पर यह बहुत ही क्रांतिकारी संयोग है कि जबसे NDA सरकार आई है तबसे ज़ी-न्यूज का वही पक्ष रहा है जो सरकार का पक्ष रहा है। चौधरी जी एंड कंपनी को सरकार में एक भी गलतियां नहीं दिखी है। बढ़ती बेरोजगारी, महँगायी, गरीबी के साथ भाजपा नेताओं का गुंडागर्दी, भ्रष्टाचार,बच्चों का अवैध व्यापार, यहां तक कि ISI से संबंध होना भी उन्हे बहुत छोटी बात लगी इसीलिए उन्होने इनसब बातों को अपने चैनल पर चलाना मुनासिब नहीं समझा, कदाचित भाजपा नेताओं की पसंद – नापसंद इतने बड़े मुद्दे लगे कि उन्होने उनकी पूरी दिनचर्या अपने चैनल पर चलाना तर्क-संगत लगा। इस प्रेम को नया आयाम देते हुए मोदी सरकार ने सुधीर जी को तोहफे के रूप मे सितंबर 2015 से X श्रेणी की सुरक्षा  मुहैया कराना शुरु कर दिया है।

जिसपर एकतरफा होने, बिकाऊ होने, फर्जी स्टिंग कराने, झूठे खबर और भ्रष्ट होने के साक्ष्य सहित भीषण आरोप हो और उनमे से ज्यादातर सच्चे साबित हुए हो, वैसे मीडिया हाउस का लोकप्रियता के शिखर पर होना कहां तक भारतीय लोकतंत्र की संप्रभुता के लिए ठीक है।

निम्नता की शिखर को छू-चुके  कई मीडिया हाउस को सबसे ज्यादा देखा जाना आखिर देश की किस मानसिकता को दर्शाता है? यह बता पाना कठिन है परंतु इस बात से मुह नहीं मोड़ा जा सकता है कि बहुत बड़ी आबादी जो बिकाऊ मीडिया के पीछे पागल है और आंख बंदकर विश्वास करती है वह शायद इनके कारनामों से अनभिज्ञ हैं।
एक ऐसे समय में जहां विपक्ष अपंग हो, उस वक्त भी ऐसे शक्तियों का शीर्ष पर होना देश के भविष्य के लिए काफी भयावह है और ज़रूरत है कि भारतीय प्रेस परिषद सभी बिके हुए, एकतरफा बयानबाजी करने वाले मीडिया हाउस पर कड़ी कार्रवाई करे पर इसकी आशा काम ही है क्योंकि विरोध और प्रश्नहीन समाज मे चौतरफा राज करना हर तानाशाह की हसरत रही है।