राजस्थान में विधानसभा चुनाव है, और यहां की राजनीति में जातिवाद हमेशा से ही हावी रहा है। ऐसे में राजस्थान में जातिगत आकड़ो और अपने जातिगत वोटों के प्रभाव वाली सींटों के लिहाज में राजपूत दुसरे नंबर पर आते है।

इसलिए राजपूत समाज हर सरकार में अपना हिस्सा चाहता है। बीजेपी ने जहां एक तरफ भैरोसिंह शेखावत से लेकर वसुंधरा राजे तक, राजपूत समाज के नेताओं को मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री बनाने का काम किया है, तो वहीं कांग्रेस पार्टी ने राजपूत नेताओं को आजादी के इतने लंबे समय बाद भी मंत्री, मुख्यमंत्री तो दूर की बात है, उनके बाहुल्य के आधार पर टिकट तक नहीं दिया है।

राजपूत समाज के नेताओं का कहना है की कांग्रेस ने हमें कभी भी आजादी के इतने सालों बाद उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया है, जबकि बीजेपी ने हमारे समाज के नेताओं को मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री और तो और बाबोसा भैरोंसिंह शेखावत को मुख्यमंत्री से लेकर उपराष्ट्रपति तक बनाने का काम किया है, इसलिए राजपूत समाज कांग्रेस से नाराज है।

राजनैतिक पंडितों का कहना है कांग्रेस को राजपूतों को किनारे करना इस विधानसभा चुनाव में मंहगा पड़ सकता है।

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