राजस्थान में 2008 से 2013 तक कांग्रेस पार्टी की सरकार थी और अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे। गहलोत सरकार की नाकामीयों ने राजस्थान में कांग्रेस का बंटाधार कर दिया था, और नतीजन कांग्रेस आजादी के बाद राजस्थान में पहली बार विधानसभा में 21सीट और लोकसभा में शून्य सीटों पर सिमट गई थी।

गहलोत सरकार की पाँच नाकाम योजनाएं

1.निवेश – गहलोत अपनी सरकार के वक्त राजस्थान में रोजगार के दृष्टिकोण से बाहरी निवेश के तौर पर बिलकुल भी काम नहीं कर पाए जिसके कारण राजस्थान में नए रोजगार के अवसर नहीं बन पाये और नौजवानों ने कांग्रेस सरकार को चुनावों में सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

2. नियमों का ठीक तरह कार्यान्वयन ना होना- सूचना की गारंटी अधिनियम गहलोत सरकार में लागू हुआ लेकिन मॉनिटरिंग के अभाव में यह कानून भी उपयोगी साबित नहीं हुआ ।

3. भर्तियां अटकी-  गहलोत सरकार में तृतीय श्रेणी शिक्षक सहित कनिष्ठ अभियंता के हजारों पदों की भर्तियां अटक गई जिससे युवाओं में काफी रोष था जिसका खामियाजा गहलोत को चुनावी हार के रूप में देखना पड़ा।

4. मेट्रो का सपना अधूरा – गहलोत सरकार ने जयपुर में मेट्रो की एकमात्र योजना का शिलान्यास किया लेकिन जयपुर को मेट्रो देने के सपने को मूर्त रूप नहीं दे पाए और इसके चलते जयपुर की जनता ने गहलोत की सरकार के खिलाफ  दिया नतीजन गहलोत सरकार हार गई।

5. कानून व्यवस्था लाचार- गहलोत सरकार में कानून व्यवस्था की कमी नज़र आई जिसके नतीजे गोपालगढ़ कांड और राजस्थान विधानसभा के सामने पुलिस और वकीलों में लाठी जंग देखने को मिली। इन सब के चलते आम जनता में भय व्याप्त हो गया और राजस्थान में कांग्रेस को 21 सीटों में समेट दिया।

गहलोत सरकार अपनी नाकामियों के चलते ना सिर्फ़ सत्ता से बाहर हुई बल्कि आजादी के बाद पहली बार राजस्थान में कांग्रेस की इतनी बुरी हार हुई।

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