राजस्थान में विधानसभा चुनाव और ऐसे में सियासत अपने परवान पर है।लेकिन इस बीच सियासत में राहुल गांधी की किरकिरी होती हुई नजर आ रही है। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी राजस्थान में चुनाव से पहले कई दौरे किए है।

साथ ही कई रैलिया और जनसभाऐ कि जिनमें एक बात अक्सर कहते नजर आऐ है। यह साफ तौर पर कहा है,कि पैरासूट कैंडिडेट को उतरने नहीं देंगे और अगर कोई गलती से उतरा तो में ऊपर कैची से उसकी रस्सी काट दूँगा।लेकिन टिकट वितरण में मामला तो पलट गया और राहुल गांधी कि बात पर अमल नहीं हुआ।राहुल गांधी अक्सर अपने बयानों में हल्की बात करते नजर आते हैं,और इसलिए हास्य के पात्र बन जाते हैं। लेकिन अब तो गजब हो गया राहुल गांधी को जहां देश की जनता सीरियस नहीं लेती है।

वही अब उनकी पार्टी के दिग्गज नेता भी उन्हें नजरअंदाज कर रहे हैं, लिहाजा राजस्थान में अजय माकन ने प्रदेश कार्यालय पर अजय माकन ने पत्रकार वार्ता के सवाल पर जवाब देते हुए कहा कि “पैराशूट कैडिडेट को लेकर राहुल गांधी ने जो बयान दिया है,वह उनका निजी बयान है।”

सियासत के जानकारों का कहना है,कि जहाँ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के मुंह से निकली बात लोहे की लकीर होती है।लेकिन अजय माकन के इस रुख से लगता है,कि वेटिंग इन पीएम की श्रेणी में खड़े राहुल गांधी का अपनी पार्टी पर कमजोर नियत्रण है कि आम आवाम से लेकर पार्टी पदाधिकारी तक हल्के में ले रहे है।लिहाजा ऐसे में कांग्रेस पार्टी पतन कि ओर है, क्योंकि जब राष्ट्रीय अध्यक्ष ही माने कप्तान ही कमजोर नजर आऐ और हो तो ऐसी पार्टीयां गर्त में चली जाती है।वही विपक्षीयों का कहना है कि जो पार्टी नहीं चला और संभाल पाऐ वो देश क्या ?चला पाएगें।

ऐसे में यह पक्तियां राहुल गांधी के इस हालत पर फिट बैठती है।
“जातिवाद परिवारवाद का यह तूफान चलाते है,
जेब कतरने वाले भी दर्जी कि दुकान चलाते है ।।
दृष्टिहीनता के शिकार भी तीर-कमान चलाते है,
घुटनों घुटनों चलने वाले भी कांग्रेस का शासन चलाते है।।

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