चुनावी डेस्क – आखिर सत्ता का नशा किसे नहीं होता है। जब बिल्ली के भाग्य का छींका टुटता है।तो अच्छे अच्छों कि मति मारी जाती है।यही केजरीवाल के साथ दिखाई पड़ता है। पुराने साथियों को एक एक कर किनारे करना केजरीवाल के राजनैतिक षड्यंत्र और अपनी कुर्सी के बचाने कि तिकड़़म अरविंद को सत्ता का लालची और मतलबी साबित करती है।

“आप” के भीतर बीते पांच साल सुप्रीम कौन ? इस बात कि आपसी लड़ाई कभी पीएससी कि मीटिग में तो कभी सड़क पर।राज्यसभा भेजते वक्त, टिकट वितरण में साफ साफ नज़र आई है।

सियासी जानकार कहते केजरीवाल ने “मैं सुप्रिम” के अहम और पार्टी में आपसी कलह के कारण पांच साल दिल्ली के बर्बाद किए है। विकास के नाम पर विज्ञापनो में रंग-रोगन हुआ है। अन्यथा केजरीवाल को आखिरी 6 महीनों में लोकलुभावन और मुफ्त के वादे नहीं करने पड़ते।

मीडिया सर्वे कि माने तो गोकुलपुर में खस्ता हाल सड़कें, गंदा और जहरीला पानी, डैमेज सीवरेज, लटकते तारों का जाल गोकुलपुर कि जनता बेहाल केजरीवाल मालामाल है।दिल्ली की जनता कंगाल है।सबको 11फरवरी के नतीजों का इंतज़ार है।

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