दिल्ली के हाई प्रोफाइल इलाकों में से एक करोल बाग सीट है। जहां आम आदमी पार्टी और बीजेपी लगातार अपनी जीत के लिए जी तोड़ मेहनत कर रही है।

लिहाजा करोल बाग में बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है। विकास केवल केजरीवाल सरकार के विज्ञापनों तक सीमित है। इस बात का अंदाजा आप इस तरह लगा सकते है। करोलबाग इलाके में समय पर पीने को साफ और शुद्ध पानी उपलब्ध नहीं होता है। वही कई जगह पानी का स्तर पीने लायक भी नहीं होता है। जहरीला गंदा और बदबूदार पानी पीने को मजबूर है।

वही दुसरी ओर टैंकर माफियाओं की एक पूरी गैंग है।जो मनमाने तरीकों से पैसों की वसूली करती है।करोल बाग की स्थानीय बाशिंदों का कहना है आम आदमी पार्टी के टैंकर माफिया गुंडे और छूट भैया नेता जनता की आवाज उठाने पर डराते धमकाते है।

सूत्रों के हवाले से खबर है कि जब यह बात स्थानीय विधायक से कही जाती है। तो वह इसे नजरअंदाज करते है। विधायक के साथ संगठन में बड़े स्तर के लोग पूरी सांठगांठ पर टैंकर माफियाओं की पूरी गैंग चलाते है। मनमाने तरीके से लोगों से वसूली करते है।कई बार तो नौबत मारपीट तक आ जाती है।

वहीं सियासी जानकारों का कहना है कि 2015 में केजरीवाल ने बिजली और पानी के मुद्दे पर चुनाव लड़ा जिसके बदले में दिल्ली की जनता ने उन्हें 70 में से 67 सीटें थी परंतु आज जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जो दिनों दिन और भयावह होती जा रही है। वहीं राजनीतिक शह के बिना टैंकर माफिया गुंडे मारपीट नहीं कर सकते है।

ऐसे में करोल बाग के आमजन का टैंकर माफियाओं का गुस्सा ईवीएम पर आम आदमी पार्टी के 2020 विधानसभा चुनाव में वापसी के सपने का सफाया कर सकता है।

हालांकि हर सरकार की जिम्मेदारी है कि वह आमजन को खास करके बुनियादी सुविधाएं सड़क, बिजली, पानी, हवा, स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं दे। लेकिन दिल्ली में विकास की तस्वीर बहुत भयावह में नजर आ रही। ऐसे में करोल बाग सीट के नतीजे चौंकाने वाले हो सकते है। खैर 11 फरवरी के दिल्ली विधानसभा के नतीजों का इंतजार रहेगा।

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