चुनावी डेस्क- देवली सीट का गठन 2002 में बने परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद 2008 में किया गया था. चुनाव आयोग ने यहां 2008 में पहली बार विधानसभा चुनाव कराए गए थे.

दिल्ली विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है, ऐसे में सभी राजनीतिक पार्टीयां जोर-शोर से चुनावी प्रचार में जुट चुकी हैं. दिल्ली की सल्तनत पर बैठने के लिए हर पार्टी कमर कस कर चुनावी मैदान में उतर गई है और जनता तमाम लुभावने वादें कर रही है. हालांकि अब ये चुनाव परिणाम के बाद ही पता चलेगा की देश की राजधानी की सत्ता पर दोबारा आम आदमी पार्टी को मिलेगी या कांग्रेस-भाजपा सत्ता हासिल करेगी.

वहीं सियासी जानकारों का कहना है. की देवली में आम आदमी पार्टी कि सरकार बुनियादी तौर पर बेहतर काम नहीं कर पाई है. या यूं कहें आप के विकास के दावों का दम देवली की गलियों में दम तोड़ता नजर आ रहा है.

देवली का रिपोर्ट कार्ड आम आदमी पार्टी को बैकफुट पर धकेल रहा है. ऐसे में देवली सीट पर आप की जीत की गणित दूर की कौड़ी नजर आती है. खैर 11 फरवरी के नतीजे सब कुछ सामने ला देंगे.

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