आखिर क्यूँ वसुंधरा की नीतियाँ जारी रखना चाहते हैं अशोक गेहलोत ?

जिस भी राज्य या देश में चुनाव के नतीजों के बाद जिस भी पार्टी की सरकार बनती हैं। वह दल अपनी विचार धारा के अनुसार योजनाएं बनाता है,और लागू करता है।लेकिन राजस्थान चुनाव के बीच एक बड़ा चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां चुनाव में कांग्रेस नेता लगातार भाजपा सरकार की योजनाओं गरिया रहे थे और भाजपा सरकार की योजनाओं को गलत साबित करने में लगातार लगे थे।

तो वही अचानक नया मोड़ आ गया है, आज गहलोत ने भरतपुर के चुनावी कार्यक्रम में मंच से कहा है, की वसुंधरा सरकार की मौजूदा सभी योजनाओं को कांग्रेस इसी प्रकार से आगे भी बरकरार रखेगी और साथ ही यह भी कहा कि यही एक खूबसूरत लोकतंत्र की पहचान है।

तो वहीं बीजेपी के नेताओं का कहना है, की देश की आवाम और प्रदेश के आवाम तो भाजपा सरकार की राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं को लेकर अंतिम छोर तक पहुंचा चुकी हैं।

और लाभार्थियों की संख्या पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में कई गुना बढ़ी है, हमारी साफ नियत और सही काम का ही नतीजा है, सबका साथ सबका विकास के लक्ष्य को ध्यान में रखकर हम ने काम किया उसको प्रदेश की जनता ने तो स्वीकार ही है। और यही वजह है कि हमनें केंद्र सहित हिंदुस्तान के आधे से ज्यादा राज्यों में भाजपा ने अपना परचम लहराया है। और तो और अब तो कांग्रेस के सीनियर नेता भी मानने लगे हैं कि भाजपा सरकार की योजनाएं दूर दृष्टि और जनकल्याणकारी हैं।

सियासी जानकारों का कहना है की वसुंधरा सरकार की योजनाओं को अगर कांग्रेस सरकार मे आने के बाद यथावत रखने की बात कर रही है तो यह भाजपा के लिए मनोवैज्ञानिक विजय है। भाजपा सरकार की कई योजनाओं को राजस्थान के अलावा भी कई राज्यों में लागू किया गया है, और भामाशाह योजना की तो प्रधानमंत्री तक ने तारीफ की है और दुनिया के कई देश इस योजना को अपने देश की व्यवस्था के अनुसार अपनाना चाहते है। खैर, गहलोत के इस बयान ने भाजपा को चुनाव से पहले ही मनोवैज्ञानिक बढ़त दे दी है।

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