वसुंधरा सरकार ने 26,000 तृतीय श्रेणी शिक्षकों ( REET L1 ) की नियुक्तियों की राह खोली थी, परंतु कांग्रेस ने सदैव की भीति युवाओं की भावनाओं को दरकिनार करते हुए इन नौकरियों पर निर्वाचन आयोग में आचार सहिता के उलंघन का हवाला देते हुए शिकायत पत्र भेज रोक लगा दी।

ये कांग्रेस का पहला प्रयास नहीं था जो उसने साढ़े 17 लाख युवाओं की मेहनत और उनके भविष्य से खिलवाड़ करने की कोशिश की थी।

REET L1 की परीक्षा बिना किसी रुकावट संचालित करी गयी और उसका परिणाम 8.04.2018 को घोषित कर दिया गया, लेकिन 12.04.2018 को कांग्रेस ने युवाओं को वोट बैंक पॉलिटिक्स का शिकार बनाते हुए, अपने मुख्य हथियार महेंद्र कुमार जाटोलिया, कमलेश चौधरी व विवेक कुमार से माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर करी।
वसुंधरा सरकार ने युवाओं के हित में इन निराधार याचिकाओं को ख़ारिज करते हुए सुगम रूप से 31.05.2018 को इन भर्तियों को संकट से निकाला था । जिसके परिणामस्वरूप माननीय उच्च न्यायालय ने भर्ती प्रक्रिया को जारी रखने के आदेश दिए थे।

कांग्रेस के मुख्य अधिवक्ता विज्ञानं शाह ने राजस्थान की भाजपा सरकार की हर भर्ती पर याचिका दायर करवा, भर्ती पर रोक लगवाने का काम किया है। चाहे वो REET लेवल प्रथम हो, या REET लेवल द्वितीय। कांग्रेस की चापलूसी करने और युवओं को रोज़गार के नाम पर गुमराह करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। जो यह साबित करता है की वोट बैंक के नाम पर कांग्रेसी किसी भी हद तक गिर सकते हैं – कोई हरकत इनके लिए नीच नहीं!

जब सिंगल बेंच ने निराधार याचिका को ख़ारिज कर दिया तो विज्ञानं शाह ने अशोक गहलोत के अधिवक्ता AAG RN MATHUR के साथ मिलकर REET लेवल प्रथम के 26,000 भर्तियों के फैसले को एक बार फिर चुनौती दी। जब याचिका ख़ारिज कर दी गयी थी तो अपने आप को युवाहेतिषी बताने वाली कांग्रेस ने वापस अदालत का दरवाज़ा क्यों खटखटाया ??

जस्टिस सराधना को जब उच्च न्यायालय का न्यायाधीश होने के नाते यह पता था कि दायर याचिकाओं में कोई सत्यता नहीं है और भर्ती प्रक्रिया पूर्ण पारदर्शी तरीके से हुई है – जिस प्रक्रिया को उच्च न्यायालय ने स्वयं हरी झंडी दिखाई – तो फिर क्यों उन्होंने इस मुद्दे को मई से 8 अक्टुम्बर तक लंबित रखा?

आदर्श आचार सहिंता लागु होने के बाद उच्च न्यायालय ने 8 अक्टुम्बर को याचिका ख़ारिज कर भर्तियों पर से स्टे हटाने का निर्णय लिया जिसे विभाग द्वारा निर्वाचन आयोग के पास स्क्रीनिंग के लिए भेजा गया।

क्या वजह रही जिस कारण अधर में लटकी इस भर्ती, जिसको भाजपा सरकार ने सकुशल निकाल लिया था – उस पर एक बार फिर डबल बेंच ने स्टे लगा दी?

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