कांग्रेस पार्टी आजादी से ही हिंदुस्तान में एकछत्र राज करती रही है। आजादी के शुरूआती दशकों में कांग्रेस पार्टी सामने कोई मजबूत विपक्ष ही नहीं रहा। यही वजह है की कांग्रेस पार्टी अपनी मनमर्जी के कानून बनाती रही है, और नतीजन कांग्रेस पार्टी शुरू से ही ब्राह्मण विरोधी और मुस्लिम प्रेमी रही है। कांग्रेस ने शुरुआती सालों में ही यह तय कर लिया था की अगर मुस्लिम वोटरो को एक तरफा अपनी और करना है, तो ब्राह्मणों को किनारे करना होगा।

वही सियासी जानकारों का कहना है की बडी सूक्ष्मता के साथ कांग्रेस सरकार की योजनाएं को देखेगें तो लगेगा की मुस्लिम लोगों को ज्यादा मौका दिया गया हैं। क्योंकि कांग्रेस की नेताओं का मानना है, कि कांग्रेस के लिए मुस्लिम वोट बैंक सुरक्षित और विश्वसनीय है।

इसलिए कांग्रेस की तमाम पिछली सरकारें लगातार ब्राह्मण विरोधी योजनाएं लाती रही है। कांग्रेसी सरकार ने दस साल तक दिऐ जाने आरक्षण वाली नीति को लगातार बढाती गई।

कांग्रेस पार्टी की शह और सहयोग से कश्मीरी पंडितों को कश्मीर से पलायन करना पडा। अब निजी तरीकों से भगवान राम को काल्पनिक बताना हो या देश को जातियों में बांट कर हिंदुओं को कमजोर करना हो। कांग्रेस पार्टी लगातार अपने मुस्लिम वोटबैंक को बचाने की जुगत में पिछले कई दशकों से ब्राह्मणों को किनारे करने में लगी हुई है। वही सियासी जानकारों का कहना है की कांग्रेस की इस ब्राह्मण विरोधी नीति के चलते कांग्रेस की जमीन खिसक गई है।

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