आर्मी की जानकारी लीक मामला: 3000 SIM कार्ड और 50 मोबाइल फोन के साथ भाजपा का नेता चला रहा था ISI का नेटवर्क

एमपी एटीएस ने ISI के लिए जासूसी करने के आरोप में 11 लोगों को अरेस्ट किया है। इनके पास से 3 हजार सिमकार्ड, 50 मोबाइल फोन और 35 सिम बॉक्स बरामद किए हैं। इसके अलावा फर्जी नाम-पते पर खोले गए सैकड़ों बैंक अकाउंट्स की भी जानकारी मिली है। एमपी में ये ISI नेटवर्क के खिलाफ की गई सबसे बड़ी कार्रवाई है। बता दें कि गुरुवार को एटीएस ने एमपी के ग्वालियर से 5, भोपाल से 3 जबलपुर से 2 और सतना से 1 शख्स को अरेस्ट किया था।

वॉयल ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (VOIP) के जरिए देश के सीक्रेट पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को भेजते थे। इसके लिए एक कॉल सेंटर भी बनाया गया। इस मामले में प्रदेश की ATS ने जितेन्द्र यादव व कुश पंडित को गिरफ्तार किया है। जितेन्द्र यादव ग्वालियर की BJP पार्षद वंदना सतीश यादव का जेठ है। और जितेंद्र यादव BJP के वरिष्ठ नेता कैलाश विजय विजयवर्गीय के बेहद करीब है

 

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ATS ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो पाकिस्तान खुफिया एजेंसी ISI एजेंटों को देश में आर्मी के ऑपरेशन्स की जानकारी इकट्ठा करने में मदद करता था। ये गिरोह सिम बॉक्स, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, डाटा कार्ड और लेपटॉप के जरिए पेरेलल टेलीफोन एक्सचेंज चलाता था।

पाकिस्तान खुफिया एजेंसी ISI के एजेंटों के कॉल्स को रूट कर स्थानीय नंबरों के जरिए देश की खुफिया जानकारी इकट्ठा करने में गिरोह मदद करता था। ATS ने इनके कब्जे से मोबाइल फोन, कई कंपनियों की सिम कार्ड, सिम बाक्स, लेपटॉप, चाईनीज बॉक्स आदि बरामद किया है।

एटीएस आईजी संजीव शमी ने बताया कि पिछले साल नवंबर में जम्मू-कश्मीर के आरएसपुरा से सतविंदर सिंह और दादू नामक दो आतंकियों को अरेस्ट किया था। इन्हाेंने कबूल किया था कि मध्य प्रदेश से इन्हें मदद मिलती थी। इसके लिए इन्हें मोटी रकम दी जाती थी, जो सतना में रहने वाले बलराम के खाते में पाकिस्तानी हैंडलर्स ट्रांसफर करते थे। सतविंदर पाकिस्तानी हैंडलर्स के कहने पर सैन्य सूचनाएं जुटाता था। पुल और सेना के कैम्प की फोटो खुफिया तरीके से लेता था। इसके अलावा, सेंट्रल सिक्युरिटी फोर्सेस के मूवमेंट और वाहनों की जानकारी भी जुटाई जा रही थी। बलराम ने अलग-अलग बैंकों में अकाउंट्स खोल रखे थे।”

एटीएस के मुताबिक, “नेटवर्क का मास्टर माइंड दिल्ली के एक कोचिंग सेंटर का टीचर गुलशन सेन है। उसने मप्र के अलावा दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र, महाराष्ट्र, ओडिशा और उप्र में पैरलल टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित करने के लिए करीब एक हजार सिम बॉक्स किराए पर दिए थे।” गुलशन लखनऊ जेल में है। यूपी एटीएस ने जम्मू-कश्मीर से उसे मिलिट्री इंटेलिजेंस की निशानदेही पर पकड़ा था। इसके बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।

एटीएस ने बताया, “गुलशन सेन दो बार अफगानिस्तान जा चुका है। वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। उसने अफगानिस्तान में पांच साल रहकर काम किया।” वह अफगानिस्तान में तैनात अमेरिकी सेना के लिए आईटी कम्युनिकेशन सपोर्ट का काम करता था। जहां उसने पैरलल टेलीफोन एक्सचेंज सेटअप करना सीखा। उसका अप्वाइंटमेंट अमेरिका की एक प्राइवेट कंपनी के जरिए हुआ था।”

कर्नल विक्रम तिवारी के नाम से आता था फोन
“पिछले कई महीनों से सैन्य अफसरों के नाम बताकर आर्मी यूनिट्स में सेना के मूवमेंट पूछे जा रहे थे। बार-बार इसी तरह के फोन आने पर सेना के टेलिकम्युनिकेशन डिपार्टमेंट को संदेह होता था।” एक दिन जम्मू में कर्नल विक्रम तिवारी बनकर सेना का मूवमेंट पूछा गया तो शक यकीन में बदल गया कि पैरलल एक्सचेंज के जरिए जासूसी की जा रही है। यूपी एटीएस ने पड़ताल शुरू की। 24 जनवरी को 11 लोगों को अरेस्ट किया गया।”

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