बवाना मे घूमा खेल, “आप” को क्यों सता रहा हार का डर?

चुनावी डेस्क- दिल्ली में फिर से वापसी का दम भरने वाले अरविंद केजरीवाल के लिए क्या वापसी करना आसान रहेगा। क्योंकि मौजूदा परिप्रेक्ष्य में और राजनीतिक समीकरणों को देखें तो दिल्ली में केजरीवाल की वापसी के संकेत धुंधले नजर आ रहे है। सियासत में हर पल खेल बदलता रहता है।

लिहाजा अगर दिल्ली के बवाना इलाके की बात करें तो आम आदमी पार्टी के लिए इस बार की राह आसान नहीं होगी। यह अपने आप में चौंकाने वाली बात है। कहीं ना कहीं हार के डर की ओर इशारा भी है।

आप के एक सीनियर नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया है। की बवाना में पार्टी द्वारा करवाए गए तीनों सर्वे में आम आदमी पार्टी बैकफुट पर नजर आई है। इस बार बवाना में जीत के आसार कम है।

वहीं विपक्ष इस बात का मुद्दा बना रहा है। पूरे 5 साल केजरीवाल सरकार और उसके विधायक बुनियादी सुविधाओं को लेकर कोई काम नहीं कर पाए। अब हार साफ दिख रही है। ऐसे में हाय तोबा मजाक कर विकास का झूठा ढिंढोरा पीट रहे है।

वहीं सूत्रों की माने तो केजरीवाल पर 10 से 20 करोड़ में टिकट बेचने के आरोप भी लगे है। गौरतलब है कि बीते दिनों लाल बहादुर शास्त्री के प्रपौत्र आदर्श शास्त्री ने भी केजरीवाल पर पैसे लेकर टिकट बेचने का आरोप लगाया था। ऐसे में यह खुले तौर पर एक बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

सियासी जानकारों का कहना है कि त्रिलोकपुरी में धरातल पर कोई काम नहीं हुआ है। विधायक की नाकामी के चलते और आमजन में आम आदमी पार्टी के खिलाफ गुस्से को देखते हुए। बवाना में “आप” को भारी नुकसान के आसार है। ऐसी में बाबा ना “आप” के हाथ से छीन सकता है।

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