चुनावी डेस्क- दिल्ली में विधानसभा चुनाव है. आम आदमी पार्टी, बीजेपी, कांग्रेस तमाम पार्टियां अपने अपने घोषणा पत्र के साथ चुनाव मैदान में है. जहां केजरीवाल सरकार दिल्ली में बेहतर विकास का दावा कर रही है. हर जगह विज्ञापनों में बेहतर दिल्ली का सपना दिखा रही है.

लेकिन दिल्ली की बवाना सीट पर केजरीवाल का विकास दम तोड़ता नजर आ रहा है. जनसंख्या के लिहाज से बवाना में बुनियादी सुविधाएं ना के बराबर है. आमजन का जीना दूभर है. हालांकि केजरीवाल अपने विकास की डुगडुगी हर जगह बजा रहे है.

बवाना में “आप” के स्थानीय विधायक का भयंकर विरोध है। क्योंकि अधिकतर हिस्सों में जलभराव की समस्या है. सीवरेज बंद है, ऐसे में गंदा पानी तैरता हुआ कई बार घरों में घुस जाता है. खस्ताहाल सड़कें है, बवाना के पूरे इलाके में एक भी बड़ा अस्पताल नहीं है. बच्चों के अनुपात में शिक्षक नहीं है. खेल के पर्याप्त मैदान नहीं है बच्चों के लिए.हर तरफ सरकार कि गंभीर संवेदहीनता नज़र आती है।

बवाना अरविंद केजरीवाल की नाकामियों का एक डेमो स्टेशन बन गया है. अगर यह कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. क्योंकि अगर आपको दिल्ली का विकास देखना है. एक बार आप याद से बवाना जरूर जाइए चमकते-दमकते विज्ञापनों में दिखता विकास आपको सड़क के गड्ढों में भरे पानी में दम तोड़ता नजर आएगा. बल्कि कई बार बवाना कि तंग बदबूदार गलियों में आपका उल्टी करने का जी हो जाएगा.

वहीं सियासी जानकारों का कहना है कि बवाना इलाके में उतना विकास नहीं हुआ है. जितने वादे और दावे हुए है. ऐसे में बवाना का बवाल “आप’ कि वापसी में ग्रहण लगा सकता है।

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