चुनावी डेस्क- दिल्ली की हाई प्रोफाइल सीटों में से एक मंगोलपुरी से आम आदमी पार्टी की राखी विधायक है. किसी जमाने में झुग्गी झोपड़ियों से अटा रहने वाला यह इलाका. अब बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल्स की शक्ल में एक विकसित इलाका नजर आता है. लेकिन धरातल पर कुछ और ही चल रहा है.

लेकिन आम आदमी पार्टी की आपसी कलह और अरविंद केजरीवाल के अपने साथ के नेताओं से लगातार लड़ाई और पार्टी के भीतर और बाहर करने की जद्दोजहद के बीच बीते 5 बरस में धरातल पर काम तो हुआ है. आधा अधूरा और दिखावटी काम ज्यादा हुआ है.

मुख्य मार्गों को तो ठीक से बनाया गया है. लेकिन मंगोलपुरी के गलियों में सड़कों पर मलबा पड़ा है. उबड़ खाबड़ सड़कें, जानलेवा गड्ढे नुमा सड़कें जब आप इन सड़कों पर सफर करेंगे. आपको लगेगा नहीं कि आप दिल्ली में है. आपको लगेगा कि आप सड़क के रास्ते से पाताल जा रहे है. खैर, यह सब आपको मजाक लग सकता है पर सच यही है.

सियासी जानकारों का कहना है कि अगर केजरीवाल ने 5 साल में दिल्ली में विकास किया होता. तो आखिरी 6 महीने में लोकलुभावन योजनाएं और तेजी से काम नहीं करना पड़ता. खास करके फ्री की योजनाएं तो बिल्कुल नहीं लाते. क्योंकि जब आप सुलभ शौचालय भी ₹5 देकर जाते हैं तो फिर आप 5 साल फ्री में पानी और बिजली कैसे ले सकते है. जरूर कोई ना कोई गोलमाल है.

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