गैस के दाम पर सरकार आफ़त में,विपक्ष ने की किरकिरी

देश में 18 करोड़ लोगों से उनकी एलपीजी गैस सब्सिडी खत्म करने के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए विपक्ष ने शुक्रवार(4 अगस्त) को कटाक्ष किया कि पेट्रोलियम मंत्री ने क्या कोई रामचरितमानस पढ़ा है या हनुमान चालीसा पढ़ी है, जिससे रातों रात ये 18 करोड़ लोग अमीर हो गए हैं, जिससे कि उनकी सब्सिडी खत्म की जा रही है।

लोकसभा में भारतीय पेट्रोलियम और ऊर्जा संस्थान विधेयक 2017 पर चर्चा की शुरूआत करते हुए कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि सरकार एलपीजी सब्सिडी सिलेंडर की कीमत धीरे-धीरे करके बढ़ा रही है, जिससे करीब 18 करोड़ लोग इस सब्सिडी से वंचित हो जाएंगे।उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि पेट्रोलियम मंत्री ने रामचरितमानस का पाठ किया है या कोई हनुमान चालीसा पढ़ी है जिससे कि रातों रात ये लोग इतने अमीर हो गए कि सरकार उनकी एलपीजी सब्सिडी खत्म करने जा रही है। बता दें कि एलपीजी सिलेंडर को लेकर सरकार ने एक अगस्त को बड़ा ऐलान किया था।

अब हर महीने एलपीजी सिलेंडर के दाम 4 रुपये बढ़ेंगे और ये तब तक बढ़ेंगे, जब तक कि सब्सिडी वाले और बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत एक समान न हो जाए। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लोकसभा में एलपीजी सिलेंडरके बारे में एक अगस्त को यह जानकारी दी थी।

हालांकि, उन्होंने विधेयक का स्वागत करते हुए कहा कि उत्कृष्ठ संस्थानों की स्थापना के लिए राज्यों को आंध्र प्रदेश का अनुकरण करना चाहिए, जहां इस संस्थान के लिए 200 एकड़ जमीन मुहैया करायी गयी है। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम मंत्री पर नसीब मेहरबान है।

पहले जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल की कीमतें 112 डालर प्रति बैरल तक थी लेकिन पिछले कुछ समय से यह 50 से 60 डालर प्रति बैरल पर बनी हुई हैं। लेकिन इसके बावजूद पेट्रोलियम मंत्री ने जनता के लिए पेट्रोल की कीमतों में वांछित कमी नहीं की।इससे पूर्व, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने विधेयक को पेश करते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश का बंटवारा होने के समय ही प्रधानमंत्री ने आंध्र प्रदेश के विकास के लिए सहयोग का जो आश्वासन दिया था उसी को पूरा करने की दिशा में बढ़ते हुए यह विधेयक लाया गया है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने इसके लिए 200 एकड़ जमीन मुफ्त में मुहैया करायी है। उन्होंने कहा कि विधेयक का मकसद आंध्र प्रदेश में भारतीय पेट्रोलियम और ऊर्जा नामक संस्था को राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित करने के लिए तथा उसके निगमन और उससे संबंधित या उसके अनुषांगिक विषयों का उपबंध करने के लिए लाया गया है।

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